berukhi se ham se sunana darde dil ki dasta aur tera hathon me wo kangan ghumana yaad hai.
शुक्रवार, 12 नवंबर 2010
राठोड हंस रहा है. राठोड हंस रहा था. राठोड हँसता रहेगा. उसी तरह जिस तरह रावण त्रेतायुग से लेकर आज तक हंस रहा है. हर वर्ष रावण का पुतला जलाया जाता है. रामलीला में हर वर्ष राम रावण कि हत्या करते है उसका अंत करते है. लेकिन उसकी हंसी का अंत नहीं कर पाते. रावण का अट्टहास ही उसकी पहचान है. यदि रावण न हँसे तो उसकी पहचान खो जाएगी. राठोर भी अट्टहास कर रहा है. राठौर प्रतीक है हमारे समाज के उस रावण का जिसकी हंसी हम बंद नहीं कर सकते. वह हंस रहा है क्योंकि वह जानता है कि कानून , समाज उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती. उसके पास सत्ता कि रावणी ताकत है. वह जानता है कि व्यवस्था की पूरी कमान ही जब रावणी शक्तियों के हाथ है . जब चपरासी से लेकर कलेक्टर तक भ्रष्ट और विवेकशून्य है तो फिर किसी की क्या मजाल कि उसका कुछ बिगाड़ सके. ऐसे रावन को मारने वाला राम अब पैदा नहीं हुआ करता. जब तक पूरा का पूरा समाज ऐसे रावणों की खिलाफ लामबंद नहीं होता अनेक रूचिकाए इसी तरह ख़ुदकुशी करती रहेंगी.
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